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Wednesday, November 5, 2008

Kuchh na hoga usay bhulanay se

ग़ज़ल
कुछ न होगा उसे भुलाने से
याद आता है वो बहाने से
उस के बारे में सोचता क्यों है
फ़ायदा क्या है दिल दुखाने से
वो मुझे छोड़ कर चला जाता
यह ही बेहतर था आजमाने से
दोस्तों का सुलूक देख के अब
कोई शिकवा नहीं ज़माने से
ग़म की तौकीर कर के यह दौलत
कम नहीं है किसी खजाने से
इश्क करना कोई मजाक नहीं
जाओ पूछो किसी दीवाने से
बोझ दिल का उतर सा जाता है
शेर अपने उसे सुनाने से
'दोस्त' कुछ देर के लिए ही सही
जी बहलता है मुस्कुराने से

Dil ke zakhm ko dho lete hain


ग़ज़ल

दिल के ज़ख्म को धो लेते हैं
तन्हाई में रो लेते हैं

दर्द की फसलें काट रहे हैं
फिर भी सपने बो लेते हैं

जो भी लगता है अपना सा
साथ उसी के हो लेते हैं

दीवानों सा हाल हुआ है
हंस देते हैं, रो लेते हैं

'दोस्त' अभी कुछ दर्द भी कम है
आओ थोडा सो लेते हैं



Batla Zindagi

ग़ज़ल
हौसला मरने का, ना जीने का यारा ज़िन्दगी
और कितने इम्तिहाँ बाकी हैं, बतला ज़िन्दगी ।
जानता हूँ तेरे दामन से मिलेगा क्या मुझे
और दे दे कर खिलोने यूँ ना बहला ज़िन्दगी ।
ख्वाब सारे ख्वाब ही हैं, ख्वाब ही रह जायेंगे
टूटने से इनका है रिश्ता पुराना ज़िन्दगी ।
अब थकन से चूर इतने हो चुके हैं जिस्म ओ जान
नींद आजाये तो हमको मत जगाना ज़िन्दगी ।
उम्र भर जिसने हकीकत बनके बहकाया हमें
आखिराश ए 'दोस्त' वो निकली फ़साना ज़िन्दगी ।

Zindagi ko Naye KhwaboN se SaNwara Jaye

ग़ज़ल
क्यूँ इसे हसरतो मातम में गुज़ारा जाए
ज़िन्दगी को नए ख्वाबों से संवारा जाए
रात तारीक है, रस्ता भी है अनजान तो क्या
आओ चल कर किसी जुगनू को पुकारा जाए
मैं तेरे साथ रहूँ, तू भी मेरे साथ रहे
जिस तरह साथ ही दरया के किनारा जाए
तुझ से ए दोस्त नए रंग ए सुखन मुझको मिले
किस तरह ये तेरा एहसान उतारा जाए
इक तमन्ना है येही, जब से मिला है कोई
ज़िन्दगी फिर तुझे इक बार गुज़ारा जाए
आओ ए 'दोस्त' नए दौर काम आगाज़ करें
अब ना माजी क। कोई दर्द उभारा जाए

Tuesday, November 4, 2008

Tamanna, Khwaab, UmmeedeN,Iraday

ग़ज़ल

तमन्ना, ख्वाब, उम्मीदें, इरादे
इन्हें लेकर कहाँ जाऊं बता दे ।

मैं सच्चा हूँ तो कर इकरार मेरा
मैं झूठा हूँ तो जो चाहे सज़ा दे ।

तुही कातिल है और तू ही मसीहा
मुझे या ज़हर देदे या दवा दे ।

जो दीवाना है दीवाना रहेगा
इलाज उसका न कर, उसको दुआ दे ।

उसी को 'दोस्त' अपना जानियेगा
जो तेरी फ़िक्र में ख़ुद को भुला दे ।

Zindagi Dard ka Safar JanaaN

ग़ज़ल

ज़िन्दगी दर्द का सफर जाना
ग़म से इस में कहाँ मफर जाना ।


आए, जिंदा रहे, गए ...... तनहा
है येही किस्सा मुख्तसर जाना ।

इसमें तुझ को बसाउ तो कैसे
दिल है तन्हाइयों का घर जाना ।

साथ किसने दिया सिवा ग़म के
कोई निकला ना मोतबर जाना ।

वो भी इक रोज़ साथ छोड़ गया
जिसको समझा था हमसफ़र जाना ।