Wednesday, November 5, 2008

Kuchh na hoga usay bhulanay se

ग़ज़ल
कुछ न होगा उसे भुलाने से
याद आता है वो बहाने से
उस के बारे में सोचता क्यों है
फ़ायदा क्या है दिल दुखाने से
वो मुझे छोड़ कर चला जाता
यह ही बेहतर था आजमाने से
दोस्तों का सुलूक देख के अब
कोई शिकवा नहीं ज़माने से
ग़म की तौकीर कर के यह दौलत
कम नहीं है किसी खजाने से
इश्क करना कोई मजाक नहीं
जाओ पूछो किसी दीवाने से
बोझ दिल का उतर सा जाता है
शेर अपने उसे सुनाने से
'दोस्त' कुछ देर के लिए ही सही
जी बहलता है मुस्कुराने से

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