
ज़िन्दगी दर्द का सफर जाना
ग़म से इस में कहाँ मफर जाना ।
आए, जिंदा रहे, गए ...... तनहा
है येही किस्सा मुख्तसर जाना ।
इसमें तुझ को बसाउ तो कैसे
दिल है तन्हाइयों का घर जाना ।
साथ किसने दिया सिवा ग़म के
कोई निकला ना मोतबर जाना ।
वो भी इक रोज़ साथ छोड़ गया
जिसको समझा था हमसफ़र जाना ।
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