
URDU POETRY: Ghazals and Nazms اردو شاعری: غزلیں اور نظمیں
Dear friend, Adaab. Thanks for visiting this blog of my Urdu poems, chiefly Ghazals and some Nazms too. Here you can read Urdu poems in Urdu script itself. I am sure you will relish these poems and would like to visit this blog again and again. Please click on the links to open larger images of the poems. I shall be grateful for your valuable comments also. Shukria. Dost Mohammed Khan.
Sunday, January 11, 2009
Tuesday, January 6, 2009
Ham ko jeenay ka hunar aaya bohut der ke baad

ग़ज़ल
हम को जीने का हुनर आया बहुत देर के बाद
ज़िन्दगी, हमने तुझे पाया बहुत देर के बाद
यूँ तो मिलने को मिले लोग हज़ारों लेकिन
जिसको मिलना था, वही आया बहुत देर के बाद
दिल की बात उस से कहें, कैसे कहें, या न कहें
मस - अला हमने ये सुलझाया बहुत देर के बाद
दिल तो क्या चीज़ है, हम जान भी हाज़िर करते
मेहरबान आप ने फरमाया बहुत देर के बाद
बात अश आर के परदे में भी हो सकती है भेद यह 'दोस्त' ने अब पाया बहुत देर के बाद
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उर्दू शाएरी,
ग़ज़ल
Wednesday, November 5, 2008
Kuchh na hoga usay bhulanay se
ग़ज़ल
कुछ न होगा उसे भुलाने से
याद आता है वो बहाने से
उस के बारे में सोचता क्यों है
फ़ायदा क्या है दिल दुखाने से
वो मुझे छोड़ कर चला जाता
यह ही बेहतर था आजमाने से
दोस्तों का सुलूक देख के अब
कोई शिकवा नहीं ज़माने से
ग़म की तौकीर कर के यह दौलत
कम नहीं है किसी खजाने से
इश्क करना कोई मजाक नहीं
जाओ पूछो किसी दीवाने से
बोझ दिल का उतर सा जाता है
शेर अपने उसे सुनाने से
'दोस्त' कुछ देर के लिए ही सही
जी बहलता है मुस्कुराने से
Dil ke zakhm ko dho lete hain
Batla Zindagi
ग़ज़ल
हौसला मरने का, ना जीने का यारा ज़िन्दगी
और कितने इम्तिहाँ बाकी हैं, बतला ज़िन्दगी ।
जानता हूँ तेरे दामन से मिलेगा क्या मुझे
और दे दे कर खिलोने यूँ ना बहला ज़िन्दगी ।
ख्वाब सारे ख्वाब ही हैं, ख्वाब ही रह जायेंगे
टूटने से इनका है रिश्ता पुराना ज़िन्दगी ।
अब थकन से चूर इतने हो चुके हैं जिस्म ओ जान
नींद आजाये तो हमको मत जगाना ज़िन्दगी ।
उम्र भर जिसने हकीकत बनके बहकाया हमें
आखिराश ए 'दोस्त' वो निकली फ़साना ज़िन्दगी ।
Zindagi ko Naye KhwaboN se SaNwara Jaye
ग़ज़ल
क्यूँ इसे हसरतो मातम में गुज़ारा जाए
ज़िन्दगी को नए ख्वाबों से संवारा जाए
रात तारीक है, रस्ता भी है अनजान तो क्या
आओ चल कर किसी जुगनू को पुकारा जाए
मैं तेरे साथ रहूँ, तू भी मेरे साथ रहे
जिस तरह साथ ही दरया के किनारा जाए
तुझ से ए दोस्त नए रंग ए सुखन मुझको मिले
किस तरह ये तेरा एहसान उतारा जाए
इक तमन्ना है येही, जब से मिला है कोई
ज़िन्दगी फिर तुझे इक बार गुज़ारा जाए
आओ ए 'दोस्त' नए दौर काम आगाज़ करें
अब ना माजी क। कोई दर्द उभारा जाए
Tuesday, November 4, 2008
Tamanna, Khwaab, UmmeedeN,Iraday
तमन्ना, ख्वाब, उम्मीदें, इरादे
इन्हें लेकर कहाँ जाऊं बता दे ।
मैं सच्चा हूँ तो कर इकरार मेरा
मैं झूठा हूँ तो जो चाहे सज़ा दे ।
तुही कातिल है और तू ही मसीहा
मुझे या ज़हर देदे या दवा दे ।
जो दीवाना है दीवाना रहेगा
इलाज उसका न कर, उसको दुआ दे ।
उसी को 'दोस्त' अपना जानियेगा
जो तेरी फ़िक्र में ख़ुद को भुला दे ।
Zindagi Dard ka Safar JanaaN
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