
Dear friend, Adaab. Thanks for visiting this blog of my Urdu poems, chiefly Ghazals and some Nazms too. Here you can read Urdu poems in Urdu script itself. I am sure you will relish these poems and would like to visit this blog again and again. Please click on the links to open larger images of the poems. I shall be grateful for your valuable comments also. Shukria. Dost Mohammed Khan.
Sunday, January 11, 2009
Tuesday, January 6, 2009
Ham ko jeenay ka hunar aaya bohut der ke baad

ग़ज़ल
हम को जीने का हुनर आया बहुत देर के बाद
ज़िन्दगी, हमने तुझे पाया बहुत देर के बाद
यूँ तो मिलने को मिले लोग हज़ारों लेकिन
जिसको मिलना था, वही आया बहुत देर के बाद
दिल की बात उस से कहें, कैसे कहें, या न कहें
मस - अला हमने ये सुलझाया बहुत देर के बाद
दिल तो क्या चीज़ है, हम जान भी हाज़िर करते
मेहरबान आप ने फरमाया बहुत देर के बाद
बात अश आर के परदे में भी हो सकती है भेद यह 'दोस्त' ने अब पाया बहुत देर के बाद
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